RTI के जवाब में आयोग ने सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन बताने से इनकार किया; धारा 8(1)(d) के तहत गोपनीयता का हवाला दिया, AI और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल पर भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ियां पकड़ने के लिए चुनाव आयोग आखिर कौन-सा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल कर रहा है? क्या इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की भी मदद ली जा रही है? इन सवालों पर RTI के जवाब ने एक नई चर्चा छेड़ दी है।स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी मांगने पर चुनाव आयोग ने इसे सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। आयोग ने अपने जवाब में कहा कि सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन कारोबार से जुड़े गोपनीय राज और बौद्धिक संपदा के दायरे में आते हैं।हालांकि, आयोग ने यह जरूर बताया कि SIR के लिए न तो कोई नया सॉफ्टवेयर बनाया गया और न ही खरीदा गया।वहीं, वोटर लिस्ट की जांच में AI या मशीन लर्निंग का इस्तेमाल हुआ या नहीं, इस सवाल पर भी आयोग ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। आयोग का कहना था कि RTI कानून के तहत उपलब्ध रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी दी जाती है, नए सिरे से स्पष्टीकरण देना जरूरी नहीं है। आयोग ने यह भी बताया कि वोटर लिस्ट तैयार करने और उसमें बदलाव करने की कानूनी जिम्मेदारी संबंधित विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी ERO की होती है। अब इस मामले में पारदर्शिता और मतदाता सूची की जांच की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल—जब वोटर लिस्ट सीधे चुनाव और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ी है, तो क्या इसकी जांच में इस्तेमाल होने वाली तकनीक के बारे में ज्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए या नहीं ?